मेरी सांसें अभी थमी नहीं...
फिर उठूंगा, चल पडूंगा।
चुप हूँ लेकिन थमा नहीं...
आग हूँ, फूंको जरा...
फिर जल पडूंगा।
अमिताभ
गुरुवार, 15 अप्रैल 2010
शनिवार, 10 अप्रैल 2010
बुधवार, 7 अप्रैल 2010

एक क्रांति बनकर सारी दुनिया बदल जाऊंगा
दो-चार पंख क्या काट लिए
सोचते हो मैं उड़ना भूल जाऊंगा...
हौसलों की उड़ान अभी बाकी है...
तुम देखनाएक दिन...
आसमान छूकर आऊंगा।
अपनी हद से भी गुजरकर देख लो...
मैं नहीं डरूंगा...
तुम्हारे बीच से निकलूंगा....
और तुम्हारा गढ ढ़हा जाऊंगा।
मेरी दुम नहीं, जो हिलाता फिरूं
यहां-वहां, सबके आगे...
तुम तानाशाह बनकर देख लो...
मैं आंधियों-सा आऊंगा...
एक क्रांति बनकर..
सारी दुनिया बदल जाऊंगा।
अमिताभ बुधौलिया
दो-चार पंख क्या काट लिए
सोचते हो मैं उड़ना भूल जाऊंगा...
हौसलों की उड़ान अभी बाकी है...
तुम देखनाएक दिन...
आसमान छूकर आऊंगा।
अपनी हद से भी गुजरकर देख लो...
मैं नहीं डरूंगा...
तुम्हारे बीच से निकलूंगा....
और तुम्हारा गढ ढ़हा जाऊंगा।
मेरी दुम नहीं, जो हिलाता फिरूं
यहां-वहां, सबके आगे...
तुम तानाशाह बनकर देख लो...
मैं आंधियों-सा आऊंगा...
एक क्रांति बनकर..
सारी दुनिया बदल जाऊंगा।
अमिताभ बुधौलिया
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
