गुरुवार, 15 अप्रैल 2010

मेरी सांसें अभी थमी नहीं...
फिर उठूंगा, चल पडूंगा।
चुप हूँ लेकिन थमा नहीं...
आग हूँ, फूंको जरा...
फिर जल पडूंगा।
अमिताभ

शनिवार, 10 अप्रैल 2010

मैं बेरोजगार हूँ

कल तक जो जान छिड़कते थे...
वे ढूंढने से भी नहीं मिलते!
अब कोई नहीं कहता...
दोस्त! मैं अब भी तुम्हारे साथ हूँ...
यह अजीब इतेफाक नहीं...
यह वो वक़्त है...
जब मैं बेरोजगार हूँ।

अमिताभ बुधौलिया 'फरोग'

बुधवार, 7 अप्रैल 2010


एक क्रांति बनकर सारी दुनिया बदल जाऊंगा

दो-चार पंख क्या काट लिए
सोचते हो मैं उड़ना भूल जाऊंगा...
हौसलों की उड़ान अभी बाकी है...
तुम देखनाएक दिन...
आसमान छूकर आऊंगा।

अपनी हद से भी गुजरकर देख लो...
मैं नहीं डरूंगा...
तुम्हारे बीच से निकलूंगा....
और तुम्हारा गढ ढ़हा जाऊंगा।

मेरी दुम नहीं, जो हिलाता फिरूं
यहां-वहां, सबके आगे...
तुम तानाशाह बनकर देख लो...
मैं आंधियों-सा आऊंगा...
एक क्रांति बनकर..
सारी दुनिया बदल जाऊंगा।

अमिताभ बुधौलिया