मंगलवार, 18 नवंबर 2008

पहचान कौन

1
ऋषिदेव दंडित हुए, नायक दिया खदेड़।
नौजवान हैरान हैं, सहमे सभी अधेड़।।
सहमे सभी अधेड़, घात है अब भी जारी।
देख प्रताप मित्र का, सबने मानी हारी।।
किसे नहीं है नौकरी प्यारी...

2
10करोड़ का लक्ष्य जुटाने निकले सारे बॉस ।
मरो-खपो पर करो उगाही, मालिक ने दी है धौंस।।
मालिक ने दी है धौंस, बहुत हो गई मक्कारी।
इससे भला परचून का धंधा, आत्मा फिर धिक्कारी।।
पर, आराम की नौकरी किसे नहीं प्यारी...

3
हाथों में है कौशल फिर भी खिंचते रहते कान।
मिला दुबारा देश निकाला, आफत में है जान।।
आफत में है जान, अगर हो इज्जत प्यारी।
दूजी नौकरी ढूंढने की कर लो तैयारी।।
हुनरमंद हो, मत बनो भिखारी।।
(भोपाल संस्करण)
अमिताभ बुधौलिया 'फरोग'