गुरुवार, 26 मार्च 2009



वो छोटी छोरी का ‘आसमां छू लेना’...

यह कोई दो साल पहले की बात होगी। झांसी(उत्तरप्रदेश) से एक लड़की दीपा भोपाल पहुंचती है। मकसद था-अपनी बड़ी बहन और पिता की ख्वाहिशों को पूरा करना। ख्वाहिशें भी क्या-थोड़ा पैसा, ताकि छोटे भाई-बहन को कुछ योग्य बना दिया जाए। जिस शहर में भी संभव हो, अपना छोटा-सा घर बन जाए? ...और वक्त मिलने पर अपनी एंकरिंग माझते रहना! सपने मुट्ठीभर ही तो रहे होंगे?

25 मार्च, 2009 से दूरदर्शन पर एक रियलिटी शो शुरू हुआ है-‘छू लो आसमान।’ इसमें छोटे कद की दीपा आकाश नापने निकल पड़ी है। ‘जिंदगी इम्तिहान लेती है’...जिस पर खरा साबित होना कोई बच्चों का खेल नहीं। फिर भी इस लड़की ने ‘खेल’ जारी रखा-एक ऐसा खेल, जिसमें तमाम मोर्चों पर हार ही हार मिली, जीत अंशमात्र। यही नाममात्र की उम्मीदों ने कुछ नये सपनों की बुनियाद रखी। कुछ नये पथ बनाए, कुछ नई मंजिलें गढ़ीं।
दीपा झांसी से भोपाल एमबीए करने आई थी। अचानक एग्जाम पर बैन लग गया। लेकिन कुछ महीने बाद बैन हटा, तो उसे भोपाल के सबसे अच्छे कॉलेजों में शुमार आइपर में एडमिशन मिल गया। जो लोग समझते हैं कि दुनिया अचानक बदल जाती है, तो वे ठीक नहीं सोचते। अचानक कुछ होने में भी पीछे किए गए ढेरों प्रयास छिपे होते हैं। लोगों को भले ही आश्चर्य होता होगा कि सामान्य शक्ल-सूरत और छोटे कद की दीपा आकाश छूने कैसे निकल पड़ी? वो भी तब, जब उसकी मुट्ठी में फिलहाल कुछ भी नहीं है, न पैसा और न ही कोई ऐसा ‘पावरफुल सूत्र’, जो गाडफादर बनकर उसे आगे धकेलता रहे? मेरा मानना है कि आकाश छूने के लिए ताकत या पैसा नहीं, साहस की आवश्यकता होती है। एक ऐसा सपना देखना पड़ता है, जिसके साकार होने की नाममात्र उम्मीद के बावजूद हमें उसमें अपनी ऊर्जा लगानी पड़ती है। दीपा का भोपाल दूरदर्शन में एंकरिंग के लिए चयनित होना भी कइयों को अंचभित कर गया था...और छू लो आसामान जैसे दूरदर्शन के संभवत: सबसे बड़े रियलिटी शो में चयिनत होने पर भी वे सहज विश्वास नहीं कर पा रहे होंगे, लेकिन अकस्मात कुछ नहीं हुआ।
दीपा एक नहीं दो सपनों को जीती रही, पहला-अपनी बड़ी बहन स्नेहा, पिता और दो अन्य बहनों और एक छोटे भाइयों के बेहतर भविष्य की खातिर एमबीए करना। ताकि कोई अच्छा-सा जॉब मिल जाए, दूसरा-छोटे-छोटे अवसरों को पूरी शिद्दत के साथ भुनाने का प्रयास किया जाए-बिना कोई बड़ा सपना देखे। यही छोटे-छोटे सपने साकार होते गए और अब बड़े अचीवमेंट का आधार बनने लगे हैं। इन लड़कियों के सिर पर मां का आंचल नहीं है। पिता के पास 'भरपूर' पैसा नहीं, लेकिन संस्कार प्रचुरता में। इन्हीं संस्कारों ने लड़कियों को स्वावलंबी, स्वाभिमानी और साहस से परिपूर्ण बनाया।
बहरहाल, दीपा इन दिनों मुंबई में है। वह देशभर से चुनी गईं 12 प्रतिभागियों में शामिल है। सबसे अच्छी बात यह है कि उसके मन में ‘जीतकर ही आना है’ जैसी भावना पैदा नहीं हुई है, हां उसे जीतना है-यह सपना वह अवश्य देख रही है। उसे आसमान छूना ही है-यह अभिमान अब भी उससे दूर है, हां, उसे आकाश छू लेने की उम्मीद जरूर है। भरोसा है-रियलिटी शो या और कहीं, दीपा आसमान अवश्य छू लेगी।

4 टिप्‍पणियां:

अनिल कान्त : ने कहा…

सच्ची लगन और मेहनत हमेशा काम आती है

रवीन्द्र प्रभात ने कहा…

दीपा को मेरी शुभकामनाएं !

anurag ने कहा…

hi dear..........
wish u a lots of wishes ......
i know u deserve the winning position..........u hv it in u .........


do ur best ...........


now lots of eyes only at u ..............

laxmikant ने कहा…

hi deepa lots of congrats to u , we all r wishing u a best of luck to u ......

we know that u'll shine in the sky ...
aur hamare shahar bhopal ka naam bhi roshan karogi..........


best wishes from,
Desired Software Solutions, Bhopal
www.desiredsoft.com